करवा चौथ व्रत 10 जरूरी नियम

करवा चौथ व्रत 10 जरूरी नियम

करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखा जाता है. ऐसे में यदि कोई महिला दिन भर निर्जल रखे जाने वाले करवा चौथ व्रत से पहले एनर्जी से जुड़ी चीज का सेवन करना चाहती हैं तो वह सूर्योदय से पहले उस चीज को ग्रहण कर सकती हैं.

करवा चौथ व्रत के दिन 16 श्रृंगार करके पूजा करने की परंपरा है, लेकिन ऐसा करते समय रंगों का चयन करते समय विशेष ख्याल रखें. करवा चौथ व्रत में भूलकर भी काले या सफेद रंग के कपड़े न पहनें क्योंकि इसे अशुभ मानाा गया है. करवा चौथ पर उजले रंग के नारंगी, लाल, पिंक, पीले आदि रंग के कपड़े ही पहनें.

करवा चौथ की पूजा सायंकाल से लगभग एक घंटा पूर्व उत्तर-पूर्व दिशा यानि ईशान कोण की ओर मुख करके करनी चाहिए. इसके बाद चंद्रोदय के समय उनका पूजन करते हुए अर्घ्य देना चाहिए.

करवा चौथ व्रत वाले दिन इस व्रत से जुड़ी कथा को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ अवश्य कहना या फिर सुनना चाहिए.

करवा चौथ व्रत की कथा सुनने के बाद सुहागिन महिला को अपनी सास को बायना देना चाहिए.

करवा चौथ व्रत को अमूमन सुहागिन स्त्रियां ही व्रत रखती हैं, लेकिन यदि किसी कन्या का विवाह तय हो चुका है तो वह वह भी अपने होने वाले पति के नाम का करवा चौथ व्रत रख सकती है, लेकिन उसे चंद्र दर्शन की बजाय तारों को देखकर व्रत खोलना चाहिए.

करवा चौथ के दिन किसी पर क्रोध या किसी के साथ विवाद नहीं करना चाहिए. करवा चाैथ पर व्रत राने वाली महिला को किसी को अपशब्द या दिल दुखाने वाली बात भी नहीं बोलनी चाहिए.

करवा चौथ व्रत के दिन व्रत को खोलने के लिए बनाए गए भोजन में लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए और इसे ग्रहण करने से पहले अपने पति को इसे खाने के लिए देना चाहिए.

करवा चौथ के दिन पूजा के बाद विशेष रूप से अपने माता-पिता या फिर उनके समान स्त्री या पुरुष और अपने पति का आशीर्वाद लेना चाहिए.

करवा चौथ के दिन किसी को दूध, दही, चावल या उजले वस्त्र दान नहीं देना चाहिए.